मंडी में बंदी से सत्तार करोड़ का नुकसान
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Tuesday 24 Nov, 2009 11:06 AM
दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मंडी आजादपुर में सोमवार को कामकाज ठप रहने से करोड़ों का नुकसान हुआ है। खासकर मंडी में उत्पाद बेचने वाले किसानों को सर्वाधिक खामियाजा उठाना पड़ा। शाम पांच बजे तक चली इस हड़ताल के बाद जब कारोबार प्रारंभ हुआ तो किसानों को उत्पादों को कम कीमत पर बेचने को मजबूर होना पड़ा। यही कारण था कि सोम ार को प्याज की थोक कीमत में प्रति मन 50 रुपये की गिरावट देखी गई। बाहर के किसानों को एक ट्रक पर करीब 15 हजार का घाटा उठाना पड़ा।
आजादपुर मंडी के आलू प्याज मर्चेट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा के अनुसार, हड़ताल के कारण करीब 50 करोड़ का नुकसान हुआ है। फल व सब्जियों के किसानों व कारोबारियों को नुकसान हुआ सो अलग। वेजिटेबल व फ्रूट मर्चेट एसोसिएशन के अध्यक्ष मेठा राम कृपलानी के अनुसार, मंडी में प्रतिदिन 50 से 60 करोड़ का कारोबार होता है। सोमवार को फल व सब्जियों का कारोबार ठप रहने से किसानों व कारोबारियों को 15 से 20 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि कारोबारियों ने बताया कि इससे आलू, प्याज व फल-सब्जियों की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसी ही स्थिति मंडी में आने वाले ट्रक मालिकों की भी रही। रविवार की साप्ताहिक बंदी के बाद सोमवार को हड़ताल से आजादपुर मंडी दो दिनों तक लगातार बंद रही। ऐसे में शनिवार को ही मंडी में आई ट्रकों से माल सोमवार को नहीं उतारा जा सका।
मंडी में हिमाचल, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तार प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि राज्यों से फल व सब्जियां लेकर प्रति दिन करीब हजार ट्रक आते हैं। इनमें अधिकांश ट्रकों के मालिक व चालक एक ही होते हैं। हिमाचल के कांगड़ा जिला से आलू लेकर आए ट्रक मालिक सतपाल सिंह ने बताया कि उनके पास चार ट्रक है। इनके लिए उन्हें प्रति माह 64 हजार रुपये किस्त चुकाना पड़ता है। उन्हें हड़ताल के कारण तीन दिनों में नौ हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
साभार / स्त्रोत - jagran.com
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