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1500 बाल मजदूर हो चुके हैं रिहा


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Saturday 14 Nov, 2009 08:52 AM
दिल्ली बाल संरक्षण आयोग के चेयरमैन आमोद कंठ ने कहा कि कुछ माह पहले अस्तित्व में आए आयोग ने बाल मजदूरी रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। आयोग की मेहनत का ही नतीजा है कि विभिन्न जगहों पर फंसे 1500 बच्चों को रिहा करवाया जा सका। उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी व बाल भिखारी को रोकने के लिए दिल्ली सरकार के पास न तो कोई कानून है और न ही कोई ऐसा फंड जिससे बाल श्रमिकों के लिए पुर्नवास की व्यवस्था की जा सके। आयोग ने हाल ही में दिल्ली सरकार को एक विस्तृत योजना तैयार करके दी है। इसमें बाल मजदूरी और बाल भिखारी को रोकने लिए बड़े स्तर पर पुनर्वास की बात कही गई है। उन्होंने ये बातें बाल दिवस की पूर्व संध्या पर प्रेस क्लब आफ इंडिया में आयोजित प्रेसवार्ता में कहीं। इस मौके पर आयोग के सदस्य शशांक शेखर आदि उपस्थित थे। आमोद कंठ ने कहा कि देश की राजधानी के लिए बड़े ही दुख की बात है कि यहां पर 4 से 5 लाख बच्चे पढ़ाई से पूरी तरह वंचित हैं। उनकी कोशिश होगी कि दिल्ली सरकार के सहयोग से ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे हर साल 40 हजार बच्चों का पुनर्वास करके पढ़ाई और स्कूल से जोड़ा जाए। अभी तक बाल श्रम रोकने व उनके पुर्नवास के लिए दिल्ली सरकार के पास न तो कानून है और न ही कोई फंड। केवल केंद्रीय श्रम आयोग के कानून पर कार्रवाई होती है। लेकिन पुनर्वास की योजना न होने से कार्रवाई के बाद भी बच्चे फिर से मजदूरी के दलदल फंस जाते हैं। कंठ ने कहा कि इसके लिए वे प्रधानमंत्री से मिलेंगे।

साभार / स्‍त्रोत -


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