वंदेमातरम गाने को मुस्लिम स्वतंत्र
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Monday 09 Nov, 2009 10:44 AM
देवबंद (सहारनपुर)। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और अध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर की आमद देश के इतिहास में नजीर बन गई। उलेमा से एक घंटे की चर्चा के बाद उन्होंने जो कहा, उस पर उलेमा ने भी मुहर लगा दी। दारुल उलूम ने कह दिया कि वंदेमातरम गाने से वे मुस्लिमों को न तो रोकेंगे और न ही गाने को कहेंगे। उन्होंने उलेमा क वंदेमातरम का अर्थ समझाया कि यह पूजा नहीं, बल्कि मातृभूमि के धन्यवाद की दुआ है।
रविवार को इस्लाम धर्म की देवबंदी विचारधारा में इतना नरम रुख पहली बार देखने को मिला। दोपहर श्री श्री रविशंकर दारुल उलूम के गेस्ट हाउस पहुंचे। उन्होंने एक घंटे तक उलेमाओं से बातचीत की। बातचीत के संबंध में उन्होंने पत्रकारों को बताया कि इस पर 12 साल पुराना फतवा है, जिस पर विचार किया गया है कि इस फतवे को लेकर देश के दो समुदायों के बीच दरार पैदा नहीं होनी चाहिए। दोनों का साथ चलना जरूरी है। मुसलमानों ने भी देश के विकास और आजादी के लिए कुर्बानी दी हैं। वंदेमातरम विरोध जैसी बातें ठीक नहीं हैं। उलेमा को वंदे का अर्थ बताया और समझाया।
श्रीश्री ने कहा कि वंदेमातरम को लेकर दो कौमों के बीच दरार पैदा नहीं होनी चाहिए, इस पर सहमति बनी है। उलेमा से कहा गया है कि जैसी सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था है कि किसी को गाने के वास्ते बाध्य न किया जाए तो उन्होंने कहा कि किसी को गाने से भी न रोका जाए। हमें दोनों समुदाय की दूरियां घटानी हैं। उलेमा इस पर सहमत दिखे। उनका भी मत यही है कि वंदेमातरम की जो पहली दो लाइनें हैं, वे आपत्तिजनक नहीं। उलेमा ने भरोसा दिलाया है कि वे इस पर विचार करेंगे। उन्हें उलेमा से आपसी प्रेम और देश प्रेम का संदेश मिला है।
पत्रकारों से दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली और मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी रूबरू हुए। मौलाना संभली ने कहा कि बातचीत के परिणाम सकारात्मक हैं। वे अमन का पैगाम लेकर आये थे और हमने स्वीकार किया है। समाज पर बातचीत का अच्छा प्रभाव पड़ना चाहिए। वंदेमातरम विरोधी जिस फतवे को विवादित बताया जा रहा है, वह 12 साल पुराना है। हम चाहते हैं कि इसे मुद्दा न बनाया जाए।' मुसलमानों के वंदेमातरम गाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे किसी को नहीं रोकेंगे। जो गाना चाहे, वह गा सकता है और न अपनी तरफ से गाने के लिए कहेंगे।' लेकिन फतवा वापस नहीं लिया जाएगा। फिर भी श्री श्री रविशंकर ने जो मफहूम उन्हें बताया उसके हिसाब से वंदेमातरम के मसले पर हम यह बात कह रहे हैं।
बता दें कि घंटे भर चली बातचीत में दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान, जमीयत उलेमा हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी मोहम्म्द उसमान मंसूरपुरी, मौलाना रियासत अली बिजनौरी, दारुल उलूम फतवा विभाग के प्रभारी मुफ्ती हबीबुर्रहमान शामिल रहे। बातचीत में शामिल मुफ्ती हबीबुर्रहमान ने ही 12 साल पहले यह फतवा जारी किया था। जमीयत के राष्ट्रीय अधिवेशन में पाच दिन पूर्व इस आशय का प्रस्ताव पास किया गया था।
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