| पहला पन्‍ना | सम्‍पर्क करें | राय दें |  हमें होम पेज चुने  | पसंदीदा में जोडें   

हिन्‍दी समाचार | अंग्रेजी समाचार | सदस्‍य | फोटो गैलेरीं | ग्रीटिंग कार्ड | सर्च | राय दें

पहला पन्‍ना | खास खबरें | भारत | दिल्‍ली | खाना खजाना | साहित्‍य | शख्सियत | सिनेमा जगत | उदयपुर | चुटकुले |
मधुमती | धर्म कर्म | भारत पर्यटन | डूंगरपुर | बांसवाड़ा | चित्तौड़गढ़ | राजसमन्द | हनुमानगढ | क्रिकेट | सी एम प्लस |
Life Style | संस्‍थागत समाचार | फोटो-फीचर | जोधपुर | भीलवाड़ा | राजस्थान | अन्तर्राष्ट्रीय | अन्य राज्य | अजमेर | सरकारी आदेश |
prashants corner | बीकानेर | उत्सव-व्रत कथा | पंचायत चुनाव | गीत-गजल | व्यापार | निरंकुश आवाज़ | शिल्पग्राम उत्सव | सखी-मंगला | सम्पादकीय |
समसामायिक | जीवोत्थान | टेक्‍नोलोजी
| स्वास्थ्य |

     


दूतावास बंद होने से बचाने में जुटी निरुपमा


This story has been read 467 times. Share



Saturday 10 Oct, 2009 05:11 PM नई दिल्ली काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमले के अगले ही दिन सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने शुक्रवार को काबुल पहुंचीं विदेश सचिव निरुपमा राव का एजेंडा दूतावास को बंद होने से बचाने का भी है। जान हथेली पर रख नौकरी कर रहे कई अधिकारियों ने दूतावास अस्थायी तौर पर बंद करने के लिए दबाव बढ़ाना शुरू कर दि ा है। युद्धग्रस्त मुल्क में अपने कूटनीतिकारों के इस रुख से चिंतित विदेश मंत्रालय ने कोशिशें तेज कर दी हैं कि दूतावास बंद होने की नौबत न आए। आत्मघाती हमले के फौरन बाद निरुपमा का काबुल कूच करना मंत्रालय की इसी रणनीति का हिस्सा है।

सूत्रों के अनुसार अमेरिका भी लगातार कोशिश कर रहा है कि भारत काबुल स्थित अपना दूतावास बंद न करे। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसे किसी भी कदम से तालिबान के हौसले बढ़ेंगे। वहीं उनसे लोहा ले रहे अमेरिकी और नाटो देशों की सेना का मनोबल टूटेगा।

सूत्रों की मानें तो काबुल स्थित भारतीय दूतावास को अस्थाई तौर पर बंद करने के अधिकारियों के बढ़ते दबाव की भनक अमेरिका को भी लग चुकी है। अमेरिकी कूटनीतिकारों ने कोशिश भी शुरू कर दी है कि भारत ऐसे किसी दबाव में न आ पाए। दिल्ली में गुरुवार को अमेरिकी राजदूत टी. रोएमर की विदेश सचिव के साथ हुई मुलाकात को वाशिंगटन की इस कोशिश से जोड़ कर भी देखा जा रहा है।

उधर काबुल में भारतीय राजदूत जयंत प्रसाद से लेकर सभी अधिकारियों के साथ राव ने शुक्रवार को अलग-अलग बातचीत की। विदेश सचिव ने उन्हें समझाया कि अफगानिस्तान में अपनी भूमिका काफी आगे बढ़ा चुके भारत को इस मौके पर दूतावास बंद करने जैसे किसी भी कदम से कूटनीतिक नुकसान होगा। वहीं विश्व बिरादरी के बीच ऐसे किसी फैसले से भारत की छवि खराब होने का हवाला भी दिया गया। यह भी कहा गया कि इससे सारे किए-कराए पर पानी भी फिर सकता है और तालिबान तो यही चाहता है। भारत को अफगानिस्तान से निकाल फेंकने के मकसद से ही तालिबान ने दूतावास पर हमलों का सिलसिला जारी रखा है।

जानकार सूत्र बताते हैं कि पिछले साल जुलाई में दूतावास पर हुए पहले आत्मघाती हमले के बाद से ही वहां का स्टाफ काफी भयभीत है। उनका डर इस खुलासे ने और बढ़ाया है कि इस तरह के हमले महज कुछ तत्वों के कारनामे नहीं हैं, बल्कि इसमें पाकिस्तान सरकार की एजेंसियों की मिलीभगत और उनकी सोची-समझी साजिश है।



साभार / स्‍त्रोत -


Advertisement

खबरें और भी है

प्रमुख व प्रधानों के लिए चलती रही कश्मकश
1 पर भाजपा को मिली सफलता
श्रीमती मालवीया करेंगी नामांकन दाखिल
निगम चुनाव भी मिलकर लडें़गे : प्रणब
निशाने पर फिर आए कृषिमंत्री
और दिलशाद गार्डन में मेट्रो सेवा बाधित
परिवहन मंत्री को नहीं मिली बस में सीट
डॉक्टर ने दी थी आतंकी को पनाह
दमतोडता चिकित्सकों को आन्दोलन
शॉपी से दस लाख के मोबाइल चोरी
टायर फटने से बस पलटी, 20 घायल
में भाई-बहन सहित पांच मरे
मजदूरों की खैर पू
रूठे उद्यमियों को मनाएंगी ममता
मुलायम सिंह को बचाने के लिए बचाई थी सरकार
   ताजा वीडियों
Error: config file ./video/cpmfetch_config.php specified but was not found.

सर्व अधिकार सुरक्षित । यह वेबसाइट लेक्‍सपेरेडाइज डाट काम द्धारा बनायी गयी है