खल रही है फौज में अफसरों की कमी
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Monday 31 Aug, 2009 05:01 AM
देवीसिंह बडगूजर जोधपुर। बीते पांच सालों में थलसेना के 43 सौ अफसरों ने सेवाकाल पूरा करने से पहले ही वर्दी उतार कर विदाई ले ली। कमोबेश यही कहानी वायुसेना और नौसेना की भी है। निर्धारित पदों के मुकाबले 14 सौ अफसरों की कमी से जूझ रही वायुसेना की मेज पर भी 2004 के बाद एक हजार 277 अफसरों के इस्तीफे मंजूर करने पडे।
इसी तर डेढ हजार अफसरों की कमी से परेशान नौसेना में भी बीते पांच साल में एक हजार से ज्यादा अधिकारियों ने समय से पहले इस्तीफे दे दिए। जबकि दूसरी तरफ भारी-भरकम भर्ती अभियान, करोडों रुपए का मीडिया कैंपेन और युवाओं को आकर्षित करने के लिए फिल्मों तक का सहारा लेने के बावजूद नतीजा वही ढाक के तीन पात। तमाम कोशिशों के उपरांत भी भारतीय रक्षा सेनाओं में अफसरों की कमी का रोग है कि ठीक होने का नाम ही नहीं ले रहा। इतना ही नहीं चिंता की बात तो यह है कि तीनों सेनाओं से ब्रेन ड्रेन भी बदस्तूर जारी है।
रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकडे बताते हैं कि थल सेना तो अपनी नीयत संख्या के मुकाबले करीब दो-तिहाई अफसरों के साथ ही काम कर रही है। आंकडे बताते हैं कि सेना में अफसरों के 46 हजार 614 पद हैं लेकिन मंजूर पदों की इस संख्या के मुकाबले थलसेना के पास 35 हजार 227 अफसर ही मौजूद हैं। यानी 11 हजार 387 अफसरों की कमी।
रक्षामंत्री एके एंटोनी ने पिछली बार राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया कि बीते पांच साल में थलसेना के 43 सौ अफसरों ने सेवाकाल पूरा करने से पहले ही वर्दी उतार कर विदाई ले ली। कमोबेश यही कहानी वायुसेना और नौसेना की भी है। निर्धारित पदों के मुकाबले 14 सौ अफसरों की कमी से जूझ रही वायुसेना के रनवे पर भी 2004 के बाद एक हजार 277 अफसरों के इस्तीफे मंजूर करने पडे। इसी तरह डेढ हजार अफसरों की कमी से परेशान नौसेना में भी बीते पांच साल में एक हजार से ज्यादा अधिकारियों ने समय से पहले इस्तीफे दे दिए। अफसरों की कमी के बारे में रक्षा मंत्रालय की उम्मीदें शॉर्ट सर्विस कमिशन के नियमों में बदलाव और सेवा स्थिति सुधार के लिए एवी सिंह समिति की सिफारिश के क्रियान्वयन पर टिकी हैं। एवी सिंह समिति की सिफारिश के दूसरे चरण को सरकार की मंजूरी के आठ महीने बाद भी सुधार नहीं है। पिछली लोकसभा के आखिरी सत्र में पेश रक्षा मंत्रालय की स्थाई समिति की रिपोर्ट में थलसेना में अफसरों की कमी 11 हजार 63 थीं, वहीं राज्यसभा में पेश किए गए आंकडों में संख्या बढकर 11 हजार 387 हो गई है।
साभार / स्त्रोत -
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