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राजनीति में भाग लेना एक कठिन फैसला


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Sunday 30 Aug, 2009 02:06 AM राजनीति में भाग लेना एक कठिन फैसला नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में कांग्रेस के योगदान की ओर ध्यान दिलाते हुए विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने कहा कि वह कांग्रेस के गोद लिए हुए बच्चे हैं और अभी राजनीति के गुर सीख रहे हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने शुक्रवार रात क ा कि वह कांग्रेस में काफी सोच विचार कर आए। उन्होंने महसूस किया कि भारत की विविधताओं में अगर कोई पार्टी पूरे देश को साथ लेकर चलने की बात करती है तो वह कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही एकमात्र विकल्प है।

छात्रों से खचाखच भरे कोएना हाल में उन्होंने कहा कि वह राजनयिक थे। उनके लिए देश में आकर सक्रिय राजनीति में भाग लेना एक मुश्किल काम था, लेकिन उन्होंने यह कठिन फैसला लिया। भारतीय राजनीति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ संकीर्ण राजनीति करने वाली भाजपा है, दूसरी ओर वाम दल हैं जिन्होंने विदेशी विचारधारा को गले लगा रखा है।

वाम मोर्चा को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि वाम दल किसी भी बदलाव और विकास का विरोध करते हैं। वह गरीबों को गरीब रख राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल में न्यूनतम मजदूरी दर सबसे कम है।

विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि नरेगा जैसी महत्वकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं को चलाने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है और इसके लिए आर्थिक सुधार जरूरी हो जाता है। आर्थिक सुधारों का वाम दलों द्वारा विरोध किया जाना उचित नहीं।

थरूर ने कहा कि गरीबी आज भी भारत की सबसे विकट समस्या है और देश की 70 फीसदी आबादी गरीबी का सामना कर रही है। उनका कहना था कि यदि अंतरराष्ट्रीय मानकों की कसौटी पर रखा जाए तो भारत में गरीबों का आंकड़ा और बढ़ जाएगा।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा का एक खास एजेंडा है जो पूरे देश पर लागू नही हो सकता। उन्होंने कहा कि भारत एक थाली के समान हैं जिसमें विभिन्न व्यंजन हैं और सबका अपना स्वाद है और किसी को यह जायका खराब करने का हक नहीं।

अल्पसंख्यकों से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की नीयत साफ थी, इसी कारण सच्चर समिति का गठन किया गया। पार्टी अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए तत्परता से जुटी है।

साभार / स्‍त्रोत -


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