सौ फीसदी सही था पोखरण-2 : कलाम
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Friday 28 Aug, 2009 02:58 PM
, नई दिल्ली वाजपेयी सरकार में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण (द्वितीय) की सफलता पर उठे सवालों को पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने सिरे से खारिज किया है। वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक के.संथानम के दावों को नकारते हुए कलाम ने कहा,1998 में हुए परीक्षण को हर कसौटी पर जांचा-परखा गया था। तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाह ार ब्रजेश मिश्रा और परमाणु वैज्ञानिक आर.चिदंबरम ने भी संथानम को गलत करार दिया है।
कलाम ने गुरुवार को जारी अपने बयान में कहा, परमाणु परीक्षण के बाद विस्तृत समीक्षा की गई थी। परीक्षण स्थल के नजदीक और आसपास सेस्मिक व रेडियो एक्टिविटी का आकलन किया गया था। इसके आधार पर हमारी वैज्ञानिक टीम को भरोसा हो गया कि जिस थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस का परीक्षण किया था, वह उम्मीदों पर खरा रहा है। देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता ने भी देश की नाभिकीय ताकत को भरोसेमंद करार दिया। तीनों सेना प्रमुखों की संयुक्त समिति के मुखिया एडमिरल मेहता ने कहा, भारत के तरकश में मौजूद नाभिकीय मारक क्षमता पर्याप्त भी है और विश्वसनीय भी। पोखरण परमाणु परीक्षणों के दौरान परीक्षण स्थल के इंचार्ज रहे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के पूर्व वैज्ञानिक के.संथानम ने यह कह कर नया बवाल खड़ा कर दिया है कि पोखरण-2 के परिणाम उम्मीद से कहीं कम रहे थे। जिस थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस यानी हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया गया था उसके परिणाम बेहद कमजोर थे।
सारे रिकार्ड यह बताने के लिए काफी हैं कि परीक्षण दावों के मुकाबले काफी कमजोर था। लिहाजा सरकार को परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर करने में किसी तरह की हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए।
कलाम की तरह ही ब्रजेश मिश्रा और परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष आर. चिदंबरम ने भी संथानम के दावों को आधारहीन बताया है। मिश्रा ने कहा,कलाम 1998 में रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार थे और इसके परिणामों से संतुष्ट होने के बाद ही उन्होंने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने की सहमति दी थी। वहीं, चिदंबरम ने कहा, पोखरण के परिणामों के बारे में शक की कोई गुंजाइश नहीं है।
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