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आमां-सामां देवरा...


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Monday 23 Mar, 2009 01:52 PM

राजसमंद। होली के दूसरे दिन प्रारंभ हुआ दशामाता-कथा सुनने का क्रम शनिवार को पूजन के साथ सम्पन्न हुआ। जिलेभर में महिलाओं ने शनिवार सुबह पीपल की पूजा कर दशामाता से सुख समृद्धि की कामना की। शहर में विभिन्न स्थानों पर पीपल वृक्षो के पास सुबह से ही महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया। सजी-धजी महिलाओं ने पीपल क पूजा करने के बाद दशामाता और दाडा बावजी से सुख-शांति की कामना की। पीपल की परिक्रमा कर महिलाओं ने दस कहानियां सुनी और दशामाता की वेर गले में धारण की। घर के माता स्थानक पर महिलाओं ने दशामाता की दस कहानियां सुन पूजा की और व्रतोद्यापन किया।

गिलूण्ड। कस्बे सहित आस-पास गांवों में दशामाता पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महिलाएं रंग-बिरंगे वस्त्र पहन कर ऊंची दशा की पीपÝी नीचे सोनी मांडी हाट..., आज म्हारी दशा दाडा बावजी पामणा..., आमां सामां तो देवरा सूरज सांमी पोÝ... जैसे मंगल गीत गाती हुई दशामाता थानकों पर पहुंची। महिलाओं ने आटे व हल्दी मिश्रित गहने चढाकर पूजन किया व परिवार के समृद्धि की कामना की। महिलाओं ने पीपल पूजन के बाद पथवारी की भी पूजा की।

इससे पूर्व दशामाता की कहानियों का श्रवण किया। नौ दिनों तक चले इस क्रम के आज अंतिम दिन महिलाओं ने नौ कहानिया थानक पर सुनी व दसवीं पीपल पूजन के बाद श्रवण कर व्रत का उद्यापन किया। गिलूण्ड में बस स्टैण्ड, लक्षकार मोहल्ला, पीपल चबूतरा व कुरज कस्बे में राजोरा मोहल्ला, बस्सी मोहल्ला, आजाद चौक, यादव मोहल्ला आदि जगहों पर पीपल पूज कर महिलाओं ने बुजुर्गो का आशीर्वाद लिया। खड बामनिया, काबरा, कोटडी, पीपली अहिरान, धनेरिया, गवारडी, जवासिया, कुण्डिया, पछमता, खण्डेल आदि गांवों में भी दशामाता पर्व मनाया गया।

देवगढ । महिलाओं ने व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए दशामाता की पूजा अर्चना की। मोहल्लों से सुबह पांच बजे से ही महिलाएं नए वस्त्र पहन अलग-अलग समूहों में दशामाता के पारम्परिक गीत गाते हुए पूजन के लिए निकली एवं सूरज दरवाजा बाहर, मारू दरवाजा बाहर, माधव विलास, तहसील कार्यालय के समीप, खादी भण्डार के समीप, हॉस्पीटल रोड आदि जगहों पर पीपल का पूजन किया। पूजन के दौरान आटे व हल्दी के चांद-सूरज, सीढी, दीपक, पीपल को अर्पित कर सिन्दूर एवं मेहन्दी लगा, कच्ची सूत की कूकडी के धागे को पीपल के पेड के बांध चारों और परिक्रमा की। बाद में दशामाता स्थानक पर पहंुच दस कहानियां सुनी।

शीतला माता मंदिर , सुन्दर विलास, सुखाडिया नगर के शिव व मोबेगढ के मंदिर के साथ ही चौक मोहल्ले के मंदिरों में महिलाओं ने पीपल का पूजन किया। पीपल पर मेहन्दी की दस बिन्दी लगाकर दस मुटी गेहूं के साथ पीपल की परिक्रमा की। आटे के दस फल व दस गहने माताजी को अर्पित कर दस कथाओं का श्रवण किया।

आमेट। सुबह से ही सजे-धजे महिलाओं के समूह पूजा के थाल के साथ पीपल वृक्ष की पूजा के लिए पहुंचे और माता से अखण्ड सुहाग की प्रार्थना के साथ परिक्रमा कर पूजा की। बाद में दशामाता की कथाएं सुनी।


साभार / स्‍त्रोत -


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