राजस्थानी जाजम ज्ञानगोठ में छाई "होळी रंगीली"

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Published on : 15 Mar, 17 08:03

राजस्थानी जाजम ज्ञानगोठ में छाई "होळी रंगीली"  उदयपुर, साहित्यिक संस्था युगधारा की राजस्थानी जाजम ज्ञानगोठ में गत दिवस राजबाग सभागार में 18 कवियों ने "होली रंगीली "विषय पर जमकर राजस्थानी गीत ,गजल,छंद और मुक्तकों से ज्ञान गोठ को यादगार बना दिया । संरक्षक डाॅ ओंकार सिंह राठोड की अध्यक्षता, वरिष्ठ कवि गोरी शंकर गर्ग के मुख्य आतिथ्य तथा शायर खुर्शीद नवाब एवं सुधर्म सागर मुनि के विशिष्ट आतिथ्य में कवियों ने राग बसंत और धमार में निबद्ध गीतों से होली पर्व का जमकर लुत्फ उठाया। संचालन डाॅ मनोहर श्रीमाली ने किया।
मनमोहन मधुकर की शारदे वंदना और महेन्द्र साहू ने महाराणा प्रताप पर गीत -"जयवंता रा जाया री गाथा जै म्है गाऊं"गाकर ज्ञानगोठ का आगाज किया। जाजम पर रचना पाठ करने वाले कवि थे -डाॅ राजकुमार राज ने-"शीतल लागे तन ने चाॅदणी",अशोक जैन मंथन ने गीत-"होली मनाओ छोरा होली मनाओ ",रेणु देवपुरा ने व्यंग्य-"अणी बार भी होली पै",डाॅ निर्मल गर्ग ने -" आओ खेलां आत्मीयता री होळी" सुनाकर दाद पाई। संस्था अध्यक्ष लालदास पर्जन्य ने सवैया होली गीत -"आई फागुनी बयार -उडे अबीर गुलाल ", डा ज्योतिपुंज ने वागडी हास्य गीत -"मैं पुलिस कैलाती खेरवाडा छावनी की "सुनाकर खूब गुदगुदाया और लोटपोट किया।मनमोहन मधुकर ने "होळी रा रसिया"सुनाकर वाहवाही लूटी।वहीं नन्ही कवयित्री सिद्धि श्री राणावत ने-"बेटा-बेटी एक ही जेडा पण न्ही समझे इन्सान"तथा हेमलता दाधीच ने गीत-"कान्हो भर पिचकारी म्हारे मार गियो रै" सुनाकर दाद पाई।
शिवदान सिंह जोलावास ने व्यंग्य -"रैंहट ज्यूं फिरे है परजातंतर "और संचालक डा मनोहर श्रीमाली ने हास्य होली गीत तथा लक्ष्मण पुरी गोस्वामी ने-"बकरियो तो सीधो सुरग सिधारियो"व्यंग्य सुनाकर दाद पाई ।
विशिष्ट अतिथि सुधर्मसागर मुनि ने "होली री रपट "तथा खुर्शीद नवाब ने-"हिलमिल खेलां होली "सुना कर दाद पाई।मुख्य अतिथि 88 वर्षीय गोरी शंकर गर्ग ने होली धमार गीत " फूलां री जोली भर लायो वीन्द बण ने आयो रै ,छैल छबीलो रंग रंगीलो ,फागण आयो रै"सुनाकर ज्ञानगोठ को ऊंचाईयां दी।अध्यक्षता करते हुए डाॅ औंकार सिंह राठोड ने -"होली पर्व का महत्व "समझाया ।धन्यवाद डाॅ ज्योतिपुंज ने दिया।
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