स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी शिवलाल कोटडया का निधन

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02 Nov, 10 05:37
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स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी शिवलाल कोटडया का निधन डूंगरपुर, जनजाति अंचल से स्वाधीनता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले श्री शिवलाल कोटडया का सोमवार को निधन हो गया। शहर के समीप सुरपुर स्थित मोक्षधाम पर उनकी अंत्येष्टि की गई।
स्वाधीनता आंदोलन में सेवाएं देने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानी पेंशन को नहीं स्वीकार करने वाले 90 वर्षीय कोटडया ने आज सुबह 3 बजे अंतिम सांस ली। पिछले कई दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे कोटडया अपने पीछे तीन पुत्र तथा तीन पुत्रियां छोड गए हैं। कोटडया के निधन की खबर मिलते ही बांसवाडा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद ताराचंद भगोरा, जिला कलक्टर पूर्ण चंद्र किशन, डूंगरपुर विधायक लालशंकर घाटिया, चौरासी विधायक शंकरलाल अहारी, समाजसेवी एडवोकेट शंकर यादव, नगरपालिका अध्यक्ष सुशीला भील, पूर्व अध्यक्ष शंकरसिंह सोलंकी, नगरपालिका उपाध्यक्ष पूरणमल दावडा, अतिरिक्त जिला कलक्टर टी.सी.बोहरा, जिला परिषद सीईओ हेमसिंह चौहान, तहसीलदार लियाकत हुसैन सहित कई व्यक्तियों ने कोटडिया की पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित की।
कोटडया की शवयात्रा प्रातः 11 बजे उनके पैतृक निवास से प्रारंभ हुई जिससे में सांसद, विधायक, कलक्टर और शहर के प्रबुद्धजनों ने हिस्सा लिया। शवयात्रा सुरपुर स्थित मोक्षधाम पर पहुंची जहां पर सांसद भगोरा, डूंगरपुर विधायक घाटिया, चौरासी विधायक अहारी, समाजसेवी एडवोकेट शंकर यादव, बिछीवाडा प्रधान देवराम रोत, पूर्व प्रधान देवचंद जैन, नानूराम माली, देवीलाल मोदी, नगरपालिका प्रतिपक्ष नेता पूनमचंद लबाना आदि ने पुष्पचक्र चढाया वहीं पार्षद लक्ष्मीलाल काका, रोशन दोशी, हीरालाल भील, राजस्थान सेवा संघ के शिवचरण गोयनका, कनुभाई उपाध्याय, महावीर इंटरनेशनल के विनोद दोशी, धनपाल जैन, राजेन्द्र उपाध्याय, ताराचंद श्रीमाल, वीरेन्द्रसिंह बेडसा, सुधीर जैन, महावीर जैन, पूर्व सरपंच प्रेमचंद जैन, ऋषभ जैन आदि ने कोटडया को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कोटडया की चिता को उनके पुत्र नरेन्द्रपाल कोटडया, देवेन्द्रपाल कोटडया व भद्रबाहु कोटडया ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर बडी संख्या में जनप्रतिनिधि, शहरवासी और समाजजन मौजूद थे।
नहीं स्वीकारी पेंशन व ताम्रपत्र
क्षेत्रीय सांसद ताराचंद भगोरा ने कहा है कि स्वाधीनता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले शिवलाल कोटडया ऐसे महान व्यक्तित्व थे कि उन्होंने सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को दी जाने वाली पेंशन और ताग्रपत्र को स्वीकार नहीं किया। समाजसेवी एडवोकेट शंकर यादव ने कहा कि कर्मयोगी कोटडया ने अपने कई साथियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलवाने में सहयोग किया परंतु खुद ने इसे नहीं स्वीकारा और जीवनपर्यन्त अपने गांधीवादी दर्शन को आत्मसात किए रखा और यही उनकी महानता है। डूंगरपुर विधायक लालशंकर घाटिया और चौरासी विधायक शंकरलाल अहारी ने कोटडया को जनजाति अंचल में स्वाधीनता आंदोलन का नायक बताया और कहा कि उन्होंने इस क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
रियल फ्रीडम फाईटर
कलक्टर पूर्ण चंद्र किशन ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में इतना कुछ करने के बाद भी पेंशन स्वीकार नहीं करने वाले स्वाभिमानी कोटडया रियल फ्रीडम फाईटर थे। मुझे गर्व है कि मैं इस प्रकार के स्वाधीनता सेनानी के क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं। इधर, दिल्ली स्थित राजस्थान सूचना केन्द्र के संयुक्त निदेशक एवं जनसंफ सेवा के वरिष्ठ अधिकारी गोपेन्द्रनाथ भट्ट ने भी कोटडया के निधन पर शोक व्यक्त किया है और श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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