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मुंबई जैसे हमलों की तैयारी में पाक आतंकी


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Saturday 21 Nov, 2009 11:18 AM वाशिंगटन। मुंबई आतंकी हमलों की पहली बरसी से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि उन्हें हर दिन खुफिया रिपोर्ट मिल रही है, जिनमें संकेत मिलता है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन मुंबई की तर्ज पर भारत पर और हमलों की योजना बना रहे हैं।

आतंक को राजकीय नीति के रूप में इस्तेमाल करने के पाकिस्तान के कदम ो दुखद बताते हुए सिंह ने कहा है कि भारत इस शर्त के साथ उसके साथ लंबित सभी मुद्दों के निपटारे के लिए तैयार है कि वह अपने पड़ोसी के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए अपनी सरजमीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा।

अमेरिकी यात्रा से पहले वाशिंगटन पोस्ट के साथ साक्षात्कार में सिंह ने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से भारत पीड़ित रहा है और खुफिया रिपोर्ट अब भी संकेत देती हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन बीते साल मुंबई हमलों के जैसे हमले दोबारा करने की योजना बना रहे हैं।

इसमें सिंह ने कहा है कि हर दिन मुझे खुफिया रिपोर्ट मिलती है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन मुंबई हमलों से मिलते-जुलते हमले करने की योजना बना रहे हैं। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान को भारत से डरने की जरूरत नहीं है और यह दुखद है कि ऐसी नौबत आ गई है कि राजकीय नीति के साधन के रूप में पाकिस्तान आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान के साथ लंबित सभी मामलों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी एकमात्र शर्त यह है कि भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान को अपनी सरजमीन का इस्तेमाल करने की आतंकियों को इजाजत नहीं देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यदि वाकई इस प्रतिबद्धता का सम्मान करता है तो हम बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं और अपने बीच लंबित सभी मुद्दों को सुलझा सकते हैं। सिंह ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से भारत लगभग 25 वर्षो से पीड़ित रहा है। सिंह अगले मंगलवार वाशिंगटन पहुंचेंगे और उसी दिन के वाशिंगटन पोस्ट के रविवार के संस्करण में उनका यह साक्षात्कार प्रकाशित होगा।

सिंह ने कहा कि भारत चाहता है कि अमेरिका अपने तमाम प्रभावों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान से इस रास्ते को छोड़ने के लिए कहे। मुंबई हमलों में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के लिए पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि उन्होंने पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।

सिंह ने कहा कि जहां तक मुंबई हमलों की साजिश रचने वालों का सवाल है, पाकिस्तान ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं। सिंह ने पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवाद पर भी चिंता जताई और कहा कि आतंकी पाकिस्तान के कई हिस्सों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं जो भारत की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

उन्होंने कहा कि अतीत में पाकिस्तान के फाटा क्षेत्र में सीमित रहे तालिबान और अलकायदा जैसे आतंकी संगठन अब यदि पाकिस्तान की मुख्य भूमि पर आते हैं तो मुझे लगता है कि हमारी सुरक्षा पर इसका गंभीर असर पड़ता है।

सिंह ने कहा कि हम नहीं चाहेंगे कि आतंकवाद ऐसे हालात पैदा कर दे, जिसमें कोई असैन्य सरकार नाममात्र की सरकार रह जाए।

वाशिंगटन पोस्ट के साथ साक्षात्कार में सिंह ने कहा कि अफगानिस्तान में अमेरिका और पाकिस्तान के मकसद में फर्क प्रतीत होते हैं और उन्हें नहीं लगता है कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान पूरी तरह से समर्पित है। जहां तक अफगानिस्तान का सवाल है, मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि अमेरिका और पाकिस्तान के मकसद एक समान हैं।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहेगा कि अमेरिका अफगानिस्तान से जल्द चला जाए, वहीं अमेरिका का मकसद यह है कि पाकिस्तान तालिबान से निपटने पर अपना ध्यान केंद्रित करे।

सिंह ने कहा कि पाकिस्तान चाहेगा कि अफगानिस्तान उसके नियंत्रण में हो, मुझे नहीं लगता कि अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ कार्रवाई का पाकिस्तान पूरे मन से समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा कि बेशक पाकिस्तान तालिबान के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन यह कार्रवाई तभी होती है जब सेना की च्र्वोच्चता के लिए तालिबान खतरा बनता है।

अफगानिस्तान में अमेरिका और विश्व समुदाय की भागीदारी जारी रखने की आशा जताते हुए सिंह ने कहा कि तालिबान की जीत के दुनिया पर और खासतौर पर दक्षिण एशिया एवं पश्चिम एशिया के लिए अनर्थकारीनतीजे होंगे।

सिंह ने कहा कि हमारी [भारत] चिंताएं नि:संदेह ज्यादा आपात हैं। हम आतंकवाद और उन चरम विचारधाराओं से पीड़ित रहे है जिनका प्रतिनिधित्व तालिबान करता है। यदि इसे रोका नहीं गया तो यह हमारे देश को अस्थिर कर सकता है।

एक सवाल पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए सिंह ने कहा कि अलकायदा और तालिबान एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। सिंह इस बात पर सहमत हुए कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई का शासनकाल परफेक्ट नहीं है। सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह करजई के पीछे चले, क्योंकि उन्हें दोबारा राष्ट्रपति चुना गया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति करजई का शासनकाल परफेक्ट नहीं है, लेकिन आप रातोंरात अफगानिस्तान का कायाकल्प नहीं कर सकते। इसमें लंबा समय लगेगा। लोकतंत्र को पश्चिम जिस तरह से समझता है, अफगानिस्तान में वह अल्प अवधि में शुरू नहीं हो सकता।

सिंह ने कहा कि बड़ा तथ्य यह है कि अफगानिस्तान के लाख्चें बच्चे और लड़कियां अब स्कूल जा रहे हैं। जब कोई स्कूल नहीं जाता था, तब तालिबान ताकतवर था। इससे मानव की स्वतंत्रता नजर आती है। हर किसी को संतुलित राय कायम करने की जरूरत है।

साभार / स्‍त्रोत -


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