जयपुर पहुंचीं, संघर्ष का ऎलान
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Tuesday 27 Oct, 2009 07:24 PM
जयपुर। प्रतिपक्ष के नेता पद से त्यागपत्र देने के बाद मंगलवार को जयपुर लौटीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। स्वागत से अभिभूत वसुंधरा राजे ने कहा कि यहां की जनता से मेरा राजनीति का नहीं प्यार का रिश्ता है। यहां मेरी डोली आई थी अब अर्थी जाएगी और जनता का साथ बना रहा तो आ े वाला कल हमारा ही होगा।
वसुंधरा राजे विमान से दोपहर 12.45 बजे जयपुर पहुंची और सांगानेर हवाई अड्डे पर ही लगभग चार-पांच हजार कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उनका ढोल-नगाडों से स्वागत किया गया। हवाई अड्डे से अपने राजकीय निवास तक वे वाहनों के काफिले के साथ खुली जीप में आई और मार्ग में जवाहर सर्किल, जाट छात्रावास, गोपालपुरा चौराहा, रामबाग चौराहा, अम्बेडकर सर्किल सहित कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। सिविल लाइंस स्थित उनके राजकीय निवास पर भी कार्यकर्ताओं की खासी भीड थी। कार्यक्रम में 45 विधायकों की मौजूदगी का दावा किया गया। इसके विपरीत वहां 33 विधायक ही देखे गए।
...तो टिक जाते घुटने
वसुंधरा राजे ने कहा कि राजस्थान की जनता ने 120 सीटें देकर एक ऎसे बंधन में बांध लिया जो कभी नहीं टूट सकता। यहां के लोगों ने मेरे सिर पर हाथ रखा। इसीलिए आपकी हूं और आपकी रहूंगी। वसुंधरा ने कहा कि लोगों का साथ नहीं मिलता तो समझो घुटने टिक ही जाते, इसलिए अब चाहे जो हो जाए, जनता की सेवा में कोई कमी नहीं रखेंगे।
उतार-चढाव आते रहते हैं
वसुंधरा राजे ने कहा कि राजनीति में उतार-चढाव आते रहते हैं। यह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। चढाव में बहुत खुश नहीं होना चाहिए और उतार में ज्यादा निराश नहीं होना चाहिए। वसुंधरा राजे ने अपने भाषण में प्रदेश के सभी लोक देवी-देवताओं का जयकारा लगवाया और कहा कि हमने इन सबको बांध रखा था। ईश्वर की कृपा थी, इसीलिए न पानी की कमी थी और न बिजली की। पूरा प्रदेश खुश था। वसुंधरा राजे ने कहा कि मैं यहां की हूं और आप लोगों के बीच रह कर ही आपकी लडाई लडूंगी। यह काम पुष्कर और अजमेर में ख्वाजा साहब की जियारत के साथ शुरू होगा।
पार्टी का नाम नहीं लिया
वसुंधरा राजे ने अपने सात मिनिट से ज्यादा के भाषण में प्रदेश की जनता और ईश्वर को तो याद किया, लेकिन भारतीय जनता पार्टी का नाम एक बार भी नहीं लिया। राजेन्द्र राठौड ने जरूर शुरूआत में पार्टी के नाम पर नारे लगवाए। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में वसुंधरा राजे ने कहा कि मेरे लिए पद की अहमियत नहीं है। मैंने पहले भी बिना पद के जनता के लिए बहुत काम किया है और आगे भी करती रहूंगी। उन्होंने मौजूदा सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि जनता जिस रूप में आज आई है, उससे साफ है कि लोग मौजूदा सरकार से त्रस्त हैं और अभी से पिछले पांच वर्ष का शासन याद करने लगे हैं।
जनता राजे के साथ-रोहिताश्व
विधायक रोहिताश्व शर्मा ने पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावती तेवर अपनाते हुए कहा कि प्रतिपक्ष के नेता पद से वसुंधरा राजे को हटाने से जनता खुश नहीं है और इस स्वागत के जरिए जनता ने आक्रोश प्रकट कर दिया है। उन्होंने आलाकमान के फैसले को विधायकों के अधिकारों का अतिक्रमण बताया। रोहिताश्व ने कहा कि भाजपा में कुछ नेताओं ने इस पार्टी को खत्म करने की सुपारी ले रखी है। वे पार्टी में जनता से जुडे नेताओं को चुन-चुन कर निशाना बना रहे हैं। ये लोग कौन हैं, इस सवाल पर रोहिताश्व ने कहा कि ऎसे लोग आलाकमान में ही हैं और यह जो तथाकथित आलाकमान है, वह खुद तो डूब ही रहा है, पार्टी को भी डुबो रहा है। उधर, पार्टी से निलम्बित विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि हम कोई विभाजन नहीं चाहते, लेकिन प्रतिपक्ष के नेता का फैसला विधायकों और पार्टी को मिल कर करना चाहिए। उन्होंने पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं ललित किशोर चतुर्वेदी और हरिशंकर भाभडा के बयानों को भी आग में घी डालने वाला बताया।
साभार / स्त्रोत -
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