6.75 फीसदी रहेगी आर्थिक वृद्धि दर
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Thursday 22 Oct, 2009 01:39 AM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद [पीएमईएसी] ने बुधवार को जोर देकर कहा कि कमजोर मानसून से कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभावों के बावजूद चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की आर्थिक वृद्धि दर 6.75 प्रतिशत रहेगी। पीएमईएसी का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक वित्तीय संकट का मुकाबला करने में सक्षम रहेगी।
पीएमईएसी के चेयरमैन सी रंगराजन द्वारा 2009-10 के लिए आर्थिक परिदृश्य पर प्रधानमंत्री को सौंपी गई रपट में कहा गया है, ऐसा नहीं लगता कि आर्थिक वृद्धि दर 6.25 प्रतिशत से नीचे जाएगी, बल्कि यह 6.75 प्रतिशत तक जा सकती है। औसतन भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी।
रपट को जारी करते हुए पीएमईएसी के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा कि वैश्विक वित्तीय संकट तथा सूखे की वजह से कृषि उत्पादन में कमी दो महत्वपूर्ण कारक हैं जिनसे वृद्धि दर प्रभावित होगी। कृषि उत्पादन में दो फीसद की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 18 प्रतिशत का है। पिछले वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 1.6 प्रतिशत रही थी।
रंगराजन ने कहा कि संकट से मुकाबला करने के लिए भारत दुनिया के कई अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट का बेहतर तरीके से मुकाबला किया है। संकट के बावजूद हम वृद्धि दर को कायम रखने में सफल रहे हैं।
वैश्विक वित्तीय संकट के कारण देश की आर्थिक वृद्धि दर 2008-09 में घटकर 6.7 प्रतिशत पर आ गई थी। इससे पिछले तीन वित्तीय वषो्र्र में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 9 प्रतिशत से ऊपर रही थी।
पीएमईएसी ने आगे कहा कि महंगाई की दर जो इस समय एक प्रतिशत के आसपास चल रही है, चालू वित्त वर्ष के अंत तक छह प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।
रंगराजन ने कहा कि भविष्य में महंगाई की दर में वृद्धि की संभावना के बावजूद वर्तमान मौद्रिक नीति अगले साल मार्च अंत तक जारी रहेगी। मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव वृद्धि दर तथा मुद्रास्फीतिक दबावों पर निर्भर करेगा।
पीएमईएसी के चेयरमैन ने हालांकि कहा कि खाद्यान्न की कीमतों में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक परेशान करने वाला तत्व है। इस साल खाद्यान्न का उत्पादन घटकर 22.3 करोड़ टन पर आने की आशंका है, जो पिछले साल की तुलना में 1.1 करोड़ टन कम होगा।
रंगराजन ने राजकोषीय घाटे में कमी लाने पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान स्तर को ज्यादा समय तक झेला नहीं जा सकता।
खाद्य पदार्थो की कीमतों में आई तेजी के बारे में पीएमईएसी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्राथमिक खाद्य पदाथरें के दाम 33 प्रतिशत बढ़े हैं।
पीएमईएसी की रपट में एक सकारात्मक पहलू का उल्लेख करते हुए अनुमान लगाया गया है कि चालू वित्त वर्ष में औद्योगिक वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रह सकती है, जबकि 2008-09 में यह 3.9 फीसदी रही थी। हालांकि, इस दौरान सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 8.2 प्रतिशत पर आ सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 9.7 प्रतिशत रही थी।
पूंजी प्रवाह के उत्साहवर्द्धक संकेत देते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने चेताया है कि वैश्विक वित्तीय तंत्र को यदि एक और झटका लगता है और वैश्विक महंगाई भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के रास्ते की बाधा बन सकते हैं।
रपट के मुताबिक, निवेश की दर चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद [जीडीपी] का 36.5 प्रतिशत रहेगी। पिछले वित्त वर्ष में भी यही दर रही थी। हालांकि, घरेलू परिस्थितियों में सुधार के साथ इसमें तेजी आ सकती है।
पीएमईएसी ने कहा कि बचत दर चालू वित्त वर्ष में जीडीपी का 34.5 प्रतिशत रहेगी। 2008-09 के दौरान यह दर 33.9 फीसदी रही थी।
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