दीपावली व रूप चतुर्दश एक साथ
पांच पर्वों की कड़ी टूटी !
६५ वर्षों में पहली बार हो रहा
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Monday 12 Oct, 2009 02:58 PM
उज्जैन, कालगणना की तिथियों के अनुसार इस बार दीपावली और रूप चतुर्दशी का पर्व एक साथ मनाया जाएगा तथा ज्योतिष विज्ञानियों का मानना है कि इस दिन चार ग्रह नीच राशि में होने के कारण अनिष्टकारी योग बन रहे हैं। प्राचीन समय से कालगणना की नगरी तथा पृथ्वी की नाभी कहे जाने वाले उज्जैन के ज्योतिष विज्ञानियों का मानना ै कि इस तिथि को चार ग्रह नीच राशि में होने के कारण यह योग देश के लिए ठीक नहीं प्रतीत होता है।
महाकाल ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र के संयोजक ज्योतिषाचार्य पंडित कृपाशंकर व्यास ने बताया कि इस बार दीपावली बड़े ही विचित्र संयोग लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि इस दीपावली पर पांच पर्वों की कड़ी भी टूट रही है।
हमेशा दीपावली की लड़ी में पांच त्यौहारों की माला गुथी रहती है। इनमें धन तेरस, रूप चतुदर्शी, दीपावली, गोवर्धन पूजा तथा भाईदूज शामिल हैं। लेकिन इस बार तिथियों के हेरफेर से दो त्यौहार एकसाथ ही पड़ रहे हैं।
८० वर्षीय पंडित व्यास ने बताया कि पिछले ६५ वर्षों में यह पहली बार हो रहा है जब तिथि के उदय एवं अस्त होने का समय पूरी तरह गड़बड़ा गया है। उन्होंने कहा कि सामान्यत: जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि होती है उसी के अनुसार पूरे दिन वही तिथि मानी जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है।
व्यास ने कहा कि दीपावली के दिन सूर्योदय के समय सूर्य कन्या राशि में होगा लेकिन इसी दिन दोपहर बाद यह अपनी नीच राशि तुला में चला जायेगा। इसी तरह शुक्र कन्या, मंगल कर्क एवं गुरू अपनी नीच मकर राशि में रहेंगे।उन्होंने कहा कि इस दिन बुध एवं चन्द्र भी अस्त होंगे। एकमात्र शनि ग्रह ही शुद्ध रहेगा। बाकी सभी ग्रह दूषित होने के कारण इस बार की दीपावली में अनिष्टकारी योग बन रहे हैं।
व्यास ने बताया कि ग्रहों की इस स्थिति के चलते मंहगाई, आतंरिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रश्न, राजनैतिक उठापटक के साथ प्राकृतिक प्रकोप से जन धन हानि की आशंका भी हो सकती है।
आगामी १७-१८ अक्टूबर को प्राकृतिक प्रकोप के संयोग बन रहे हैं।
राष्ट्रीय पंचांग परिषद के संयोजक ज्योतिषाचार्य पंडित बाबूलाल जोशी ने बताया कि १५ अक्टूबर को धनतेरस-धनवतंरी जयंती, १७ अक्टूबर को प्रात:काल रूप चतुदर्शी तथा सूर्योदय के बाद दीपावली, १८ अक्टूबर को अन्नकूट एवं १९ अक्टूबर को भाईदूज पर्व रहेगा।
साभार / स्त्रोत -
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