साहित्य का नोबेल हेर्टा म्युएलर को
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Friday 09 Oct, 2009 03:42 PM
गयास्टॉकहोम, : रोमानिया में जन्मीं जर्मनी की लेखक हेर्टा म्युएलर को गुरुवार को वर्ष 2009 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें अपनी कृतियों को कविता पर केंद्रित रखने और गद्य में स्पष्टवादिता के लिए यह सम्मान दिया गया है जो अधिकारों से वंचित लोगों का व्यापक चित्रण करता है। भारत की सुप्रसिद् साहित्यकार महाश्वेता देवी भी इस दौड़ में बताई जा रही थीं। स्वीडिश अकादमी के मुताबिक, वर्ष 1987 में तब के साम्यवादी रोमानिया से जर्मनी में आकर बसीं 56 वर्षीय हेर्टा ने अपनी लघु कथा के संग्रह लोलैंड्स के साथ 1982 में साहित्य की दुनिया में कदम रखा। इस कथा संग्रह पर तुरंत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। वर्ष 1984 में पुस्तक का गैर प्रतिबंधित संस्करण तस्करी के जरिए जर्मनी पहुंचा, जहां इसे प्रकाशित किया गया। यह रोमानिया में जर्मन भाषा बोलने वाले एक छोटे गांव की जिंदगी के बारे में था जिसे पाठकों ने तल्लीनता से पढ़ा। इसके बाद उनकी एक और कृति रोमानिया में ऑप्रेसिव टैंगो के नाम से आई। एकेडेमी ने कहा, रोमानिया के राष्ट्रीय प्रेस ने हेर्टा की कृतियों की आलोचना की लेकिन रोमानिया से बाहर जर्मनी के प्रेस ने इन्हें काफी सकारात्मक रूप से लिया। इसका कारण यह था कि म्युएलर ने रोमानिया में तानाशाही की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की थी और उन्हें अपने ही देश में प्रकाशन करने से रोक दिया गया था। वर्ष 1987 में वह अपने पति के साथ जर्मनी में आकर बस गई।
साभार / स्त्रोत -
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