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अमृत के लिए मंथन


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Wednesday 07 Oct, 2009 04:17 PM भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्वर्णिम मध्यप्रदेश के सपने को पूरा करने के लिए 'मंथन-2009' की शुरुआत सोमवार को हो गई। प्रशासन अकादमी में दो दिन चलने वाले इस मंथन से उस अमृत की खोज होगी, जिसकी मदद से स्वर्णिम मध्यप्रदेश के सपने को साकार करने का इतिहास रचने की कोशिश होगी। अमृत की खोज के लिए सात बिंदु य कर सात समूह गठित किए गए हैं। इन बिंदुओं में अधोसरंचना विकास, निवेश वृद्धि, कृषि को फायदे का धंधा बनाना, शिक्षा और स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, सुशासन एवं संसाधन विकास तथा सुरक्षा व कानून व्यवस्था शामिल है।

सरकार का मानना है कि इन बिंदुओं पर मंथन के बाद जो अमृत निकलेगा, उस पर अमल कर स्वर्णिम मध्यप्रदेश के संकल्प को पूरा कर लिया जाएगा। मंथन-2009 के उद्घाटन सत्र के बाद इन बिंदुओं पर गठित समूहों की अलग-अलग दो चरणों में चर्चा हुई। समूह के सदस्यों को निर्देश थे कि वे ऐसे व्यवहारिक सुझावों को ही प्राथमिकता दें, जिन पर एक साल में अमल संभव हो। समूह चर्चा के दौरान इस बात का खासतौर पर ध्यान रखा गया। कुछ समूहों ने चर्चा के लिए उप समूह भी गठित किए। जैसे, शिक्षा और स्वास्थ्य समूह ने उप समूह गठित कर अलग-अलग विषयों पर चर्चा की और सुझावों का संकलन किया। व्यवस्थित चर्चा तथा व्यवहारिक सुझावों के उद्देश्य से ऐसा ही अधोसरंचना एवं विकास, सुरक्षा तथा कानून और व्यवस्था जैसे कुछ समूहों ने भी किया।

सबसे अंत में शाम साढ़े 4 बजे के बाद निर्धारित समूहों द्वारा अपनी अनुशंसाओं का प्रारूपण किया गया। समूहों के पास दो बार गए मुख्यमंत्री : मंथन-2009 के औपचारिक शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री श्री चौहान दिनभर प्रशासन अकादमी में ही रहे और विचार-विमर्श के लिए गठित सभी सात कार्य समूहों क्रमश: अधोसंरचना एवं विकास, निवेश वृद्धि, कृषि को लाभदायी व्यवसाय बनाना, शिक्षा और स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, सुशासन एवं संसाधन विकास और सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था के कक्षों में जाकर उनकी हौसला आफजाई की। इन समूहों के कक्षों में वे दिन में दो बार गए। श्री चौहान ने प्रत्येक समूह में किए जा रहे विचार-विमर्श को ध्यानपूर्वक सुना। समूहों में शामिल सभी अधिकारियों ने अपने मैदानी अनुभवों और ज्ञान को एक दूसरे से साझा किया। प्रदेश के विकास व आम लोगों की तरक्की में आने वाले अवरोधों को दूर करने के उपायों पर विचार-विमर्श कर एक साल में पूरी किए जाने वाले व्यवहारिक सुझाव दिए। इनके आधार पर विभिन्न नीति, नियम, प्रक्रिया में व्यावहारिक बदलाव लाने, कठिन नियम-कायदों को सरल बनाने और अन्य ऐसे नए कायदे-कानून बनाए जाएंगे, जिनसे प्रदेश का विकास गतिमान हो और लोगों की कठिनाइया दूर हों।

चैलेंज हैं, तभी तो चर्चा

मंथन-2009 में पहले दिन की कसरत के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने में चैलेंज हैं, तभी तो यहां बैठकर चर्चा की जा रही है। पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस मंथन से निकले विष को त्याग दिया जाएगा और अमृत का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वर्णिम मध्यप्रदेश का संकल्प पूरा करने के लिए जो व्यवस्थाएं जरूरी हैं, यहां अधिकारी और नेता इसके लिए ही गंभीर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समूहों में वे नेता व अधिकारी शामिल हैं, जिनमें अच्छा से अच्छा सोचने की क्षमता है। श्री चौहान ने यह भी बताया कि पिछली बार हुए मंथन की 60 फीसदी अनुशंसाओं को पूरा किया जा चुका है। मंगलवार को अंतिम रूप से जो सुझाव आएंगे, उन पर भी पूरी ईमानदारी से अमल होगा।

समूहवार प्रस्तुतीकरण आज

सोमवार को विभिन्न सातों समूहों द्वारा चर्चा के उपरांत आए सुझावों पर मंगलवार को प्रात: साढ़े 9 बजे फिर चर्चा होगी और प्रस्तुतीकरण की तैयारी की जाएगी। इसके बाद लंच से पहले निवेश वृद्धि, अधोसंरचना विकास तथा कृषि को लाभ का धंधा बनाने वाले संबंधित समूहों द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा और लंच के बाद शिक्षा एवं स्वास्थ्य, महिला शसक्तीकरण, कानून व्यवस्था तथा सुशासन विषयों पर संबंधित समूह प्रस्तुतीकरण देंगे। इस प्रस्तुतीकरण में सिर्फ वह सामने लाया जाएगा, जिन्हें सुझावों के रूप में क्रियान्वित करने के लिए अंतिम रूप से तय किया गया है।

मंथन में ये शामिल

दो दिवसीय मंथन कार्यशाला में मंत्रिपरिषद के सदस्यों सहित प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभाग आयुक्त, जिला कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अन्य विकास और निर्माण विभागों के अधिकारियों सहित करीब 200 अधिकारी भाग ले रहे हैं। इससे पहले हुए मंथन में मंत्रियों के साथ सिर्फ आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया था।



साभार / स्‍त्रोत -


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