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बच्चों की निशुल्क सर्जरी करवाने में कोटा जिला सबसे आगे

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14 Jul, 18 07:20
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बच्चों की निशुल्क सर्जरी करवाने में कोटा जिला सबसे आगे
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सरफराज खान /राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत रोगग्रस्त बच्चों की निशुल्क सर्जरी करवाने में कोटा जिला प्रदेश में अव्वल बना हुआ है। कार्यक्रम के तहत विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 184 बच्चों की अब तक निशुल्क सर्जरी करवाई जा चुकि है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसमें 68 बच्चों की दिल में छेद की सर्जरी समेत 41 बच्चे कटे-फटे तालू व होंट, 21 बच्चे क्लब फुट व 4 बच्चे कॉकलियर इंम्पलांट की सर्जरी सहित अन्य सर्जरी वाले केस शामिल हैं। कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी व आरसीएचओ डॉ महेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि शहर के रामपुरा निवासी परमानन्द के 5 वर्षीय पुत्र महेश व लटूरा (सांगोद) निवासी शिवराज नागर की 4 वर्षीय बेटी राधा की भी हाल ही में जयपुर के प्राइवेट अस्पतालांे में निशुल्क सर्जरी करवाई गई है। दोनो बच्चों को आरबीएसके की मोबाइल हैल्थ टीमों ने इनके क्षेत्र की आंगनबाड़ी केंद्रो पर स्क्रीनिंग के दौरान चिन्हित किया था। ये दोनो बच्चे जन्मजात दिल में छेद की बीमारी से ग्रसित मिले थे। महेश का ऑपरेशन 4 जुलाई को मेट्रोमास होस्पिटल में, वहीं राधा का 6 जुलाई को नारायणा ह्रदयालय होस्पिटल में सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। अब दोनो बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन्हे मिलाकर इस वर्ष 2018-19 में अब तक 27 सर्जरी हो चुकि है।
डॉ त्रिपाठी ने बताया कि आरबीएसके कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों, मदरसों और आंगनबाड़ी केंद्रो में पंजिकृत 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों की स्क्रीनिंग कर 38 तरह की बीमारियों में चिन्हित कर निशुल्क उपचार प्रदान करवाया जा रहा है।
उन्होने बताया कि जिले में 12 मोबाइल हैल्थ टीमे कार्यरत है। इन टीमों ने अप्रेल, मई एवं जून महीनों में संचालित फुलवाड़ी कार्यक्रम के दौरान 1250 आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर 34131 बच्चों की स्क्रीनिंग की थी। इस दौरान 2116 बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मिले थे जिन्हे चिन्हित कर 1805 बच्चों को उपचारित करवाया गया है।
कार्यक्रम के डीईआईसी मेनेजर दिलीप कुमार ने बताया कि जुलाई से दिसम्बर 2018 तक मोबाइल हैल्थ टीमे अब 1068 स्कूल और 1291 मदरसों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंक का कार्य करेंगी जिसके लिए माईक्रो प्लान तैयार किया गया है। उन्होने बताया कि विगत वर्ष 156133 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई थी। जिनमें से रोगग्रस्त पाए गए 12561 बच्चों को उपचार के लिए रैफर किया गया था। इनमें से 12158 बच्चों को उपचारित किया गया है।
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