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हजारों घर आंगन में लगेगा तुलसी का पौधा

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14 Jun, 18 18:07
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हजारों घर आंगन में लगेगा तुलसी का पौधा
Image By Google
उदयपुर आमजन को पर्यावरण और संस्कृति के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से धार्मिक मान्यता के पौधे, पवित्रता के पर्याय, ईश्वरीयवास तुलसी को हर घर आंगन में लगाने के लिए नमो विचार मंच ‘तुलसी मेरे आंगन की’ अभियान शुरू करेगा। इसके तहत निर्जला एकादशी के पवित्र दिन 24 जून को उदयपुर के 11 हजार घरों में एक साथ एक समय तुलसी का पौधा स्थापित किया जायेगा। नमो विचार मंच के हजारों कार्यकर्ता एक साथ लोगों के घर घर जाकर तुलसी मेरे आंगन की कार्यक्रम के तहत तुलसी का पौधा रौपेंगे। साथ ही प्रत्येक परिवार को सत्य, प्रेम, करुणा का संदेश देने वाले ग्रंथ भगवद् गीता का भी वितरण किया जायेगा।
मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण रतलिया ने पत्रकार वार्ता में बताया कि तुलसी मेरे आंगन की अभियान हिन्दुत्व, पौधारोपण, मेरा देश-मेरा उत्सव, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पिता-पुत्री प्रेम और बच्चों में हिन्दू संस्कारों का अनूठा मिश्रण है। रतलिया ने बताया कि प्रथम बार एक साथ एक समय पर 11000 तुलसी के पौधे लगाने का यह आयोजन विश्व कीर्तिमान स्थापित करेगा। और गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड में दर्ज होगा।
तुलसी का वैज्ञानिक तथ्य
-आयुर्वेद में भी तुलसी का बड़ा महत्व है। तुलसी घर में रखने मात्र से एक एंटीबॉयोटिक पॉवर रिलीज होता है। तुलसी का पौधा अपने आसपास किसी भी तरह के नुकसानदायी बैक्टीरिया को नहीं पनपने देता। हमारी परम्परा रही है कि घर-घर में तुलसी का पौधा होता ही है और उसकी पूजा भी की जाती है, लेकिन नई पीढ़ी इन संस्कारों को भूल रही है जबकि यह परम्परा सीधे-सीधे पर्यावरण संरक्षण और वातावरण को स्वच्छ रखने का संदेश है। तुलसी के सेवन से सर्दी, जुखाम, बुखार से निजात मिलती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 5 पत्ते तुलसी का सेवन करना चाहिए।
बेटी जैसा महत्व है तुलसी का
-हिन्दू संस्कृति में तुलसी-शालिगराम विवाह की परम्परा है और इसकी काफी मान्यता है। कई परिवार जहां बेटी नहीं होती, वे तो इस जीवन में कन्यादान का पुण्य प्राप्त करने के उद्देश्य से तुलसी विवाह कराते हैं, वहीं कई ऐसे परिवार भी तुलसी विवाह कराते हैं जिनके बेटे भी होते हैं। इस परम्परा से यह संदेश मिलता है कि हिन्दू संस्कृति में बेटी का कितना महत्व है। बेटी नहीं है तो तुलसी को बेटी माना जाता है और उसी तरह धूमधाम से कृष्ण स्वरूप शालिगराम जी से उनका विवाह कराया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यता में यह भी है कि घर की ड्योढ़ी कुंवारी नहीं रहे, ऐसे में भी कई परिवार तुलसी-शालिगराम विवाह कराते हैं।

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