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ठाकुरजी के दिव्य दर्शन को उमडे हजारों श्रद्धालुं,

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17 Jun, 17 16:38
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ठाकुरजी के दिव्य दर्शन को उमडे हजारों श्रद्धालुं, निम्बाहेडा /मेवाड के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ द्वारा आयोजित द्वादश कल्याण महाकुंभ के सप्तम् दिवस आषाढ कृष्णा अष्टमी शनिवार को दोपहर ठीक १२.३२ बजे शंखनाद, घंटे, घडयाल, ढोल, नगाडो, तोपो की सलामी, बंदूको की गर्जन और गगन भेदी श्री कल्लाजी के जयकारे के बीच जब मंदिर के पट खुले तो नवरत्न जडत स्वर्ण आभा में ठाकुर श्री कल्लाजी के दिव्य दर्शनों की एक झलक पाने के लिए हजारों भक्त उमडे पडे। हर भक्त अपने आराध्य की अनुपम एवं मनोहारी छवि को अपने नेत्रो में बसाने के लिए लालायित था। लगभग पांच क्विंटल मोगरा, गुलाब, जरबरा, नौरंगी, आशापाल, रजनीगंधा, गेंदा, चमेली, हजारी सहित सतरंगी फूलों की अजमेर के कलाकारों द्वारा बनाई गई झांकी के बीच रजत पिछवाई के आगे ठाकुर श्री का अनुपम विग्रह भक्तों को महाराज कुमार के रूप में दर्शन दे रहा था, जिनकी छवि को निहारकर हर भक्त स्वयं को धन्य महसूस करते हुए इस कल्याण नगरी को भी नमन करता नजर आया, जहां ठाकुर श्री अनुठे ही ठाठ बाठ के साथ विराजित है। इस मौके पर मेवाड, वागड, मालवा सहित अन्य क्षेत्रों से आए सैंकडो कल्लाजी के सेवक, गादीपतियों एवं महंतो ने भी अपने आराध्य की अनुपम छवि देखकर गदगद भाव से अश्रुप्रवाहित करते हुए कहा कि वास्तव में यह धरा धन्य है, जहां ठाकुरजी ने इतनी बडी पीठ बनाकर सेवकों के साथ ही कल्याण भक्तों को निहाल कर दिया।


इस मौके पर पुराण मर्मज्ञ आचार्य डॉ. इच्छाराम द्विवेदी, भारतमाता मंदिर के युवाचार्य संत रामानुज जी, वेदज्ञ डॉ. विजयशंकर शुक्ला, वेदविदुशी डॉ. उषा शुक्ला, बालकल्याण समिति अध्याक्षा डॉ. सुशीला लड्ढा, लक्ष्मीनारायण दशोरा सहित अन्य अतिथियों ने भी ठाकुरजी के दिव्य दर्शन कर न केवल स्वयं को धन्य किया वरण इस बात की अनुभूति भी की कि इस वेदपीठ ने ठाकुरजी के मनोहारी दर्शन कराकर लाखों भक्तों को धन्य करते हुए ठाकुरजी की प्रेरणा से लुप्त होती वैदिक संस्कृति को जीवन्त करने का सुसंकल्प लेकर दिवास्वप्न को साकार करने का अनुठा कार्य किया है। जिसके लिए वेदपीठ के न्यासियों के साथ-साथ समस्त कल्याण भक्त बधाई के पात्र है। देर तक समुचा वेदपीठ परिसर ठाकुरजी के जयकारों के साथ गुंजता रहा और हर कोई भक्त अपने आराध्य के एक वर्ष उपरांत हुए दिव्य दर्शन से स्वयं को भाग्यशाली मान रहा था।
इससे पूर्व वेदपीठ पर ठाकुरजी की और से समस्त भक्तों एवं सेवकों की साक्षी में ध्वजा चढाई गई। इस दौरान हजारों भक्त वेदपीठ परिसर में मौजूद थे, जिनमें मेवाड, वागड, हाडोती, दिल्ली, बनारस, मारवाड, गुजरात सहित देश के कई क्षेत्रों से कल्याण भक्त शामिल थे।
कल्याण लोक वैदिक मंत्रो को सिद्ध करने का पावन धाम होगा-युवाचार्य रामानुजजी,
युवाचार्य संत रामानुजजी ने कहा कि वेद मंत्रो को चरण तो नहीं होते, लेकिन भक्तों की श्रद्धा के चरण मिलने से जब कल्याण लोक में वैदिक मंत्र सिद्ध होने लगेगें तो यह विश्व का ऐसा पावन धाम होगा, जहां चारों वेदो की धारा प्रवाहित होने के साथ ही यज्ञ श्रृंखला से किए जाने वाले अनुष्ठानों से कल्याण लोक सभी का तीर्थ बन जाएगा।
युवाचार्य रामानुजजी शनिवार को ब्रम्ह तीर्थ कथा मंडप में महाकुंभ के अंतिम दिवस आशीर्वचन दे रहे थे। उन्होनें कहा कि जीवन में यदि एक मंत्र भी चरितार्थ हो गया तो हमारे जीवन को अभ्युदय हो जाएगा। उन्होनें कहा कि एकांत में अश्रुओं से प्रभू के चरण प्रक्षालन कर जीवन में मुस्कुराहट को महत्वपूर्ण बनाए। इस मौके पर पुराण मर्मज्ञ आचार्य द्विवेदी ने ब्रम्ह महापुराण के मूल मंतव्य का विस्तार करते हुए कहा कि सनातन धर्म की इस परम्परा के इस जल से हमारा मस्ताभिषेक होने से हम सब धन्य हो जाएगें। इस क्रम में उन्होनें ’करो अब कृपा हमपें, ऐसी दयामय जगत में यह अब भटकने न पाए भजन सुनाकर सभी को भक्ति सरोवर में गोते लगाने पर विवश कर दिया।
पितृ जनार्दन महायज्ञ की पूर्णहुति,
महाकुंभ दौरान आयोजित पंच दिवसीय पितृ जनार्दन महायज्ञ तहत शनिवार को प्रातरू ४ बजे से आयोजित यज्ञ के बाद जब पूर्णाहुति की गई तो हजारों की संख्या में मौजूद भक्तगण भी अपने पितृ देवों की कृपा बरसने की अनुभूति कर रहे थे। इस दौरान यज्ञ मंडप, परिक्रमा तथा परिसर में मौजूद श्रद्धालुं पितृ देवों के जयकारे लगाते हुए उनके मोक्षगामी होने की कामना कर नतमस्तक होते नजर आए।
मातृ पितृ पूजन में कराई प्रत्यक्ष गणेश की अनुभूति,
वेदपीठ की परम्परा अनुसार कथा मंडप में जब मातृ पितृ पूजन का महाआयोजन किया गया तो वहां मौजूद सैंकडो माता पिता एवं उनकी संतानों ने स्वयं को कैलाश पर्वत पर होने की अनुभूति करते हुए शिव पावर्ती की गणेश जी द्वारा की गई पूजा अर्चना एवं परिक्रमा को साक्षात प्रकट कर दिया, जिसमें अधिकांश पुत्र एवं पौत्रो ने अपने माता पिता एवं दादा दादी के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से पूजा अर्चना कर चरण प्रक्षालन का प्रसाद पान कर स्वयं को धन्य करते हुए जब बुजुर्गो की परिक्रमा की तो हर किसी का मन गणेश भाव से पुरित नजर आया। इस दृश्य को देखकर आचार्य द्वय ने भी मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि भौतिक वादी युग में संस्कारों को जीवन्त करने का यह अनुठा दृश्य संभवतरू देश प्रदेश में विलक्षण है, जिसका सभी को अनुसरण करना चाहिए। इस अवसर पर वीरांगना पायल सिंह ने अपने भाव प्रकट करते हुए बागो के हर फूल को अपना समझें गीत प्रस्तुत कर समुचे वातावरण को मातृ पितृ भावना से भर दिया।
सहस्त्र ज्योति से महाआरती,
महाकुंभ के छठे दिवस शुक्रवार संध्या वेला में हजारों की संख्या में मौजूद श्रावक श्राविकाओं ने व्यासपीठ की सहस्त्र दीप ज्योति से जब महाआरती की तो जगमगाती जोत श्रंखला समुचे वातावरण को ज्योतिमान करते हुए इस बात की अनुभूति कराई की वेदपीठ परिसर धार्मिक संस्कारों को जागृत करने के साथ-साथ सभी को वेदानुरागी बनाकर वैदिक संस्कृति की जोत जगाने के लिए अनुठा प्रयास कर रही है। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष उदयलाल आंजना, गोपाल आंजना, कैलाश आंजना, प्रमोद सोनी, डॉ. आर.के. गुप्ता, डॉ. शुक्ला दम्पत्ति ने व्यासपीठ का पूजन कर महाआरती की। इस अवसर पर चित्रा बांगड की और से युवाचार्य रामानुजजी को उन्हीं का पोट्रेट चित्र भेट किया गया, जिस देखकर आचार्य द्वय ने चित्रा की चित्रकारी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
मेले में हुई खूब खरीददारी,
महाकुंभ के दौरान वेदपीठ परिसर से लेकर कल्याण पोल से दूर तक लगी दुकानों पर पिछले पांच दिनों से मेलार्थियों ने खूब खरीददारी कर मेले को सफल बनाने में योगदान किया। जहां महिलाओं के श्रृंगार प्रसाधन से लेकर पूजा सामग्री, घरेलू सामान, दैनिक उपभोग की वस्तुएं, बच्चों के खिलौने, चटपटे व्यंजन सहित कई प्रकार की दुकानों से लोगो ने मन पसंद सामग्री खरीद कर मेले का लुत्फ उठाया।
गन्नू महाराज के भजनों ने भजन संध्या को किया द्विगुणित,
महाकुंभ के छठे दिवस शुक्रवार रात्रि को सागर म्यूजिकल ग्रुप इन्दौर से जुडे कथा वाचन गन्नूजी महाराज तथा पागल बाबा के परम शिष्य सन्नी द्वारा प्रस्तुत मन भावन भजनों की प्रस्तुति से समुचा परिसर भक्तिरस में गोते लगाता रहा, जिसमें ओरगन पर कृष्णा, पेड पर सागर, ढोलक पर शुभम तथा ढोल पर योगी की संगत से भजनों की स्वर लहरियां मध्यरात्रि तक गुंजती रही। इस दौरान गन्नू महाराज ने मां की महिमा को बखानते हुए तैरी तुलना किससे करूं मां, मां तू कितने भोली है के साथ ही अनोखी थारी झांकी म्हारा कल्लाजी महाराज, मिठे रस से भरियोरी, अरे द्वार पालों, दिवाना राधे का सहित कई मन भावन भजनों की प्रस्तुतियों के दौरान श्रोता भी तालियों से संगत कर भजनानंदी स्वर लहरियों में गोते लगाते नजर आए। इसी दौरान ढोलक व ढोल पर प्रस्तुत जुगलबंदी ने श्रोताओं को झकझोर दिया। प्रारंभ में वेदपीठ की और से सभी कलाकारों को तुलसी माला व उपरणा ओढाकर स्वागत किया गया। वहीं भजन संध्या के दौरान कई बार ठाकुर श्री कल्लाजी के जयकारों से परिसर गुंज उठा।
भव्यतम् आयोजन में सभी का रहा अनुकरणीय योगदान,
कल्याण महाकुंभ के सप्तम् दिवस तक आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों एवं अनुष्ठानों की सफलता में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले समस्त श्रद्धालुओं एवं भक्तों के प्रति वेदपीठ की और से कृत्यज्ञता प्रकट करते हुए अवगत कराया गया कि अपनी प्रकार के इस अनुठे भव्य आयोजन को सफल बनाने में वेदपीठ से जुडे न्यासियों एवं कल्याण भक्तों के साथ ही वीर विरांगनाओं, शक्ति ग्रुप, कृष्णा शक्ति दल, जिला एवं पुलिस प्रशासन, चिकित्सा एवं आयुर्वेद, नगरपालिका, भाजपा, कांग्रेस, समस्त व्यापारिक, धार्मिक, सामाजिक संगठनों के साथ ही समस्त प्रेस प्रतिनिधियों के अनुकरणीय योगदान के फलस्वरूप ही विगत १२ वर्षो से आयोजित महाकुंभ के एक युग की पूर्णता पर १२ वें वर्ष में मिली अपार सफलता और हजारों लोगो का जुडाव होने के साथ ही सभी की समुचित व्यवस्थाएं संभव हो पाई। वहीं अन्नपूर्णा के रूप में भोजन शाला समिति सहित वेदपीठ की विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के प्रति भी आत्मिक भाव से आभार प्रकट किया गया।



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