शिक्षा को मानवाधिकार से जोड़ें

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20 Feb, 12 12:45
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वाराणसी : उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डीके अरोड़ा ने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामाजिक विकास होता है। मानवाधिकार सामाजिक स्तर पर समानता की प्राप्ति से जुड़ा है। शिक्षा का स्थान मानवाधिकार के लिए जरूरी है। ऐसे में शिक्षा को मानवाधिकार से जोड़ना चाहिए।
वह रविवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में मानवाधिकार एवं शिक्षा विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा मानवाधिकार की प्राप्ति का साधन है। किसी न किसी रूप में शिक्षा मनुष्य के अधिकारों व कर्तव्यों का बोध कराती है। विशिष्ट अतिथि बीएचयू विधि विभाग के प्रो. वीएन पांडेय ने कहा कि प्रजातंत्र की रक्षा में भारतीय एप्रोच मानवाधिकार के दृष्टि से पर्याप्त है।
भारतीय पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को नजर अंदाज करने के कारण ही आज मानवाधिकार से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हुई है। शिक्षाशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति प्रो. केपी पांडेय ने कहा कि शिक्षा का कार्य बुनियादी स्तर पर सामाजिकता का विकास करना होता है।
यह खबर निम्न श्रेणियों पर भी है: कला और संस्कृति
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