नई दिल्ली | नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन के साथआम नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए नए दिशानिर्देश तय किए जाएंगे। गांवों की तलाशी से लेकर संदिग्ध नक्सलियों की गिरफ्तारी में सुरक्षाबलों को इन दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। गृह मंत्रालय द्वारा बुलाई गई नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्य सचिवों व पुलिस महानिदेशकों की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही समर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए सभी राज्यों में समान नीति बनाने का भी फैसला लिया गया। वहीं, दो मार्च को गृह मंत्री पी. चिदंबरम खुद नक्सली हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित 78 जिलों के जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात करेंगे। गृह मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार मध्यवर्ग में घुसपैठ बनाने की नक्सलियों को कोशिशों को नाकाम करने के लिए मुख्य सचिवों व पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक बुलाई गई थी। दरअसल, ऑपरेशन के दौरान निर्दोष ग्रामीणों के साथ सुरक्षाबलों की ज्यादती का दुष्प्रचार कर नक्सली मध्यवर्ग में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे थे। इस दुष्प्रचार को नाकाम करने के लिए सुरक्षाबलों को ऑपरेशन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सीख देना जरूरी था। सभी गृह सचिव व पुलिस महानिदेशक इस बात पर सहमत थे कि ऑपरेशन के लिए दिशानिर्देशों के नए मानक बनाए जाएं। इसमें यह बताया जाएगा कि सुरक्षाबलों को गांवों की तलाशी के दौरान क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए या किसी गाड़ी की तलाशी में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। वहीं, नक्सलियों के एनकाउंटर की स्थिति में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने का फैसला किया गया। बैठक के दौरान राज्यों के अधिकारियों की ओर से मांग की गई कि नक्सल प्रभावित जिलों के विकास के लिए केंद्रीय सहायता से चल रही समेकित कार्य योजना (आइएपी) को पूरी 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए बढ़ा दिया जाए। गृह मंत्रालय इस पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है, पर अंतिम फैसला योजना आयोग को लेना है। इसके साथ ही बैठक में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के साथ-साथ अन्य विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के उपायों पर भी विचार किया गया। बैठक के दौरान सभी राज्य इस बात पर सहमत थे कि नक्सलियों को समर्पण के लिए प्रोत्साहित करने को विशेष उपाय किए जाने चाहिए और इसके लिए सभी राज्यों में समान नीति हो। साथ ही हथियारों के साथ समर्पण करने वाले नक्सलियों को हथियार का अलग से पैसा दिया जाना चाहिए। बैठक में एके-47 और इंसास राइफलों के लिए तीन से चार लाख रुपये और लाइट मशीन गन के लिए पांच लाख रुपये दिए जाने पर सहमति बनी।