फायदे की दोस्ती वाली कांग्रेसी शैली नागवार गुजरी सपा को

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12 Dec, 11 12:53
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महज अपने फायदे की दोस्ती वाली कांग्रेसी शैली नागवार गुजरी है। अमेरिका से परमाणु करार पर जिस अजित सिंह ने अचानक पाला बदलकर संप्रग सरकार को गिराने के लिए मायावती से हाथ मिला लिया था, कांग्रेस की अब उन्हीं से दोस्ती ने सपा की आंखें खोल दी हैं। लिहाजा, उसने खुद को संप्रग से हटने की चेतावनी दी है।
सूत्रों के मुताबिक सपा को इसका मलाल है कि 2004 से लेकर अब तक उसने केंद्र में कई बार बुरी फंसी कांग्रेस सरकार को क्यों बचाया? दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर किसी भी मौके पर कांग्रेस ने सपा का साथ नहीं दिया। बीते कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी भी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर कई मौकों पर हमला करने से नहीं चूके। इतना ही नहीं, इस बीच कांग्रेस ने मुलायम के प्रभाव वाले इटावा, कन्नौज, औरैया व आसपास के जिलों में ऐसे लगभग तीन दर्जन प्रत्याशियों को उतार दिया, जो कभी न कभी सपा में रहे हैं, या फिर मुलायम के सजातीय हैं, जबकि सपा से राज्यसभा सांसद रशीद मसूद को भी कांग्रेस में लेने की तैयारी है।
मसूद इसके लिए सपा की राज्यसभा सदस्यता भी छोड़ देंगे। माना जा रहा है कि कई सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस प्रत्याशी खुद नहीं जीतेंगे, लेकिन वे वहां सिर्फ सपा का वोट काटेंगे। पार्टी के लोगों का सवाल यह है कि कांग्रेस क्या इसके जरिये बसपा को फायदा पहंुचाना चाहती है? सूत्रों की मानें तो सपा इस पर भी हैरत है कि अमेरिका से परमाणु करार पर जिन अजित सिंह ने रात में संप्रग का साथ देने की बात कही और अगली सुबह ही सरकार को गिराने के लिए मायावती से मिल गए, अब कांग्रेस उनसे ही मिलकर यूपी में चुनाव लड़ने जा रही है।
ऐसे में सपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व पर संप्रग सरकार से समर्थन वापसी के लिए दबाव बनाना तेज कर दिया है। सपा ने कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी को अपनी पार्टी की ओर से बढ़ रहे समर्थन वापसी के दबाव के बारे में अवगत करा दिया है। हालांकि पार्टी में उसके इस फैसले से सांप्रदायिक ताकतों को फायदा पहंुचने की ऊहापोह भी बरकरार है। बताते हैं कि पार्टी यूपी चुनाव में सांप्रदायिक दलों को फायदे वाले किसी निर्णय से बचना चाहेगी, लेकिन यह सब कांग्रेस के आगे के रुख पर निर्भर करेगा।
सोनिया व राहुल से मुलाकात के बाद कांग्रेस-राष्ट्रीय लोकदल चुनावी गठजोड़ मुकम्मल होते ही चौधरी अजित सिंह ने संप्रग का घटक बनने की चिट्ठी कांग्रेस आलाकमान को भेज दी है। पांच सांसदों वाली पार्टी के इस मुखिया की सोमवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की उम्मीद है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल अभी दिल्ली से बाहर हैं। उनकी वापसी के एक दिन बाद प्रधानमंत्री के विदेश जाने का कार्यक्रम बताया जा रहा है। ऐसे में बुधवार को अजित सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह खबर निम्न श्रेणियों पर भी है: भारत , सम्पादकीय
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