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बज़्मे सूफी कल्चर द्वारा पक्की हिरोगिरी फिल्म यूनिट का स्वागत

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10 Feb, 18 11:38
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बज़्मे सूफी कल्चर द्वारा पक्की हिरोगिरी फिल्म यूनिट का स्वागत बांसवाड़ा / शूटिंग के दौरान परिस्थिति जन्य उपजे संवाद को फिल्म की विषयवस्तु मुख्यधारा में संयोगवश सम्मिलित कर लेने से सम्प्रेषण कर रहे पात्र की आन्तरिक प्रसन्नता दुगूनी हो जाया करती है। यह अनुभव साझा किया राजस्थानी फिल्म पक्की हिरोगीरी के मुख्य अभिनेता अरविन्द कुमार ने। गत चार दिनों से अपनी फिल्म युनिट के साथी कलाकारों के साथ ज़िले में रोड़ शो के पश्चात वृन्दावन छविगृह में पहुंचने पर बज़्मे सूफी कल्चर की ओर से संयोजक सिराज नूर चिश्ती, कवि हरीश आचार्य, व्याख्याता विरेन्द्र सिंह राव एवं अन्वेषणधर्मी भँवरलाल गर्ग द्वारा बधाईयुक्त स्वागत-सत्कार किए जाने के दौरान ब्यावर-अजमेर निवासी अभिनेता अरविन्द कुमार ने बताया कि शूटिंग के फाइट सीन के दौरान चश्मा टूटने के साथ ही उनकी आँखों में ज़बरदस्त इन्फेक्शन हो गया। ऐसी स्थिति में इलाज के साथ ही चश्मा पहनकर निरन्तर शूटिंग करते रहे और ‘‘चश्मे को खरौंच नहीं आनी चाहिए . . .’’ जैसा संवाद स्टंट दृश्यों में कमोबेश हर बार उच्चारित करते रहे। बज़्मे सूफी कल्चर प्रतिनिधियों ने उनके साथ वृन्दावन छविगृह में उपस्थित रहकर ‘पक्की हीरोगीरी’ फिल्म के प्रथम प्रदर्शन देखने का आनन्द भी लिया। ‘पहली बात तो ये है . . .’ और दूसरी बात बाद में बताऊँगा’’ जैसा संवाद भी चर्चा का केन्द्र रहा। स्वागत के दौरान सूफी कल्चर संयोजक सिराज नूर ने संस्था की एक दशक की प्रमुख उपलब्धियां बताई। मार्च 2010 में अस्तित्व में आई राजस्थानी फिल्म एक वखत फेरी में सूफी बिस्मिल नक्शबन्दी साहब के कलाम ‘‘सूरत हो तो ऐसी हो, सीरत हो तो ऐसी हो . . .’’ पर फिल्माए गये कव्वाली दृश्य में कवि हरीश आचार्य द्वारा मुख्य कव्वाल किरदार निभाये जाने की जानकारी पर हर्ष व्यक्त करते हुए अभिनेता अरविन्द कुमार ने कवि हरीश आचार्य का माल्यार्पण करके कलाकार की विनम्रता जीवन्त की। विरेन्द्र सिंह राव द्वारा लोकप्रिय माँ रचना का जिक्र करने पर संगीतकार आदित्य गौड़ ने आग्रह किया तो कवि हरीश आचार्य ने ‘‘बच्चों को मनाने में माँ रूठना भूल गई . . .’’ जैसी तरन्नुमी अदायगी की। भँवर गर्ग ने बज़्मे सूफी कल्चर की ओर से समग्र फिल्म युनिट का आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर बालीवूड कलाकार मनमंदिर गर्ग, फिरोज मंसूरी, संगीतकार आदित्य गौड़, अंकूर संस्थान के निदेशक शैलेन्द्र सराफ, समाजसेवी अतीत गरासिया एवं वृन्दावन छविगृह के मालिक भरत भाई भावसार आदि मौजूद थे। पक्की हीरोगीरी फिल्म के पहले शॉ के शुभारम्भ अवसर पर फिल्म यूनिट कलाकारों व अतिथियों का मुँह मीठा कराकर शुभकामनाएं दी।
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